वर्ष २०२६ की शुरुआत सोने के बाज़ार के लिए कई उम्मीदें लेकर आई थी। बीते वर्ष के अंतिम महीनों में सोने के भाव जिस तेज़ी से बढ़े थे, उससे यह माना जा रहा था कि नया वर्ष भी सोने के लिए शुभ रहेगा। लेकिन १ जनवरी २०२६ से १ फ़रवरी २०२६ के बीच सोने के भावों में जो उतार-चढ़ाव देखने को मिला, उसने बाज़ार की दिशा को पूरी तरह बदल दिया।
इस एक महीने की अवधि में सोने ने पहले मजबूती दिखाई, फिर अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की। इस बदलाव ने न केवल व्यापारियों को, बल्कि आम ख़रीदारों और दीर्घकालिक निवेशकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।
१ जनवरी २०२६ को जब नए वर्ष का पहला कारोबारी दिन शुरू हुआ, तब सोने के भाव पूरी तरह मज़बूत नज़र नहीं आए। वर्ष २०२५ के अंत में सोना लगभग एक लाख पैंतीस हज़ार रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। नए वर्ष की शुरुआत में इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई।
बाज़ार में न तो डर का माहौल था और न ही अत्यधिक उत्साह। अधिकांश व्यापारी और ख़रीदार यह देखना चाह रहे थे कि वर्ष के शुरुआती दिनों में आर्थिक परिस्थितियाँ किस दिशा में जाती हैं। छुट्टियों के कारण लेन-देन भी सीमित रहा।
जनवरी के दूसरे और तीसरे सप्ताह में सोने के भावों ने तेज़ी पकड़ ली। कुछ ही दिनों में सोना एक लाख पचास हज़ार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर को पार करता हुआ आगे बढ़ने लगा।
इस तेज़ी के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आए—
महँगाई को लेकर बनी हुई चिंता
वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता
सुरक्षित संपत्ति की ओर लोगों का बढ़ता झुकाव
इन परिस्थितियों में लोगों ने सोने को भरोसेमंद साधन मानते हुए ख़रीदारी बढ़ा दी। नतीजतन, जनवरी के मध्य में सोने के भाव तेज़ी से ऊपर गए।
जनवरी के अंतिम सप्ताह तक सोने के भावों ने नई ऊँचाइयों को छूने की कोशिश की। कुछ प्रमुख शहरों में चौबीस कैरेट सोना एक लाख सत्तर हज़ार रुपये से लेकर एक लाख छिहत्तर हज़ार रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुँच गया।
इस दौरान बाज़ार में यह चर्चा ज़ोर पकड़ने लगी कि क्या सोने के भाव और ऊपर जाएंगे या अब मुनाफ़ा वसूली का दौर शुरू होगा।
जैसे ही भाव बहुत ऊँचे स्तर पर पहुँचे, वैसे ही लाभ वसूली का सिलसिला शुरू हो गया। जिन लोगों ने पहले कम भाव पर सोना ख़रीदा था, उन्होंने मुनाफ़ा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी।
यह बिकवाली धीरे-धीरे नहीं, बल्कि काफ़ी तेज़ी से हुई। परिणामस्वरूप, सोने के भावों पर अचानक दबाव आ गया और बाज़ार की दिशा बदल गई।
जनवरी के अंतिम दो से तीन कारोबारी दिनों में सोने के भावों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कुछ ही समय में भाव दस से बारह प्रतिशत तक नीचे आ गए।
जहाँ कुछ दिन पहले सोना एक लाख छिहत्तर हज़ार रुपये प्रति दस ग्राम के पास था, वहीं गिरावट के बाद यह कई स्थानों पर एक लाख पैंसठ हज़ार रुपये से भी नीचे आ गया।
पहला — लाभ वसूली
तेज़ी के बाद मुनाफ़ा निकालना स्वाभाविक प्रक्रिया है। यही प्रक्रिया इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बनी।
दूसरा — आर्थिक नीतियों को लेकर असमंजस
आने वाले समय में मौद्रिक नीतियों और सरकारी निर्णयों को लेकर स्पष्ट संकेत न मिलने से व्यापारी सतर्क हो गए।
तीसरा — विदेशी मुद्रा की मजबूती का प्रभाव
विदेशी मुद्रा मज़बूत होने से सोने की माँग पर असर पड़ा और भाव नीचे आए।
१ फ़रवरी २०२६ तक यह साफ़ हो गया कि सोने के भाव फिलहाल दबाव में हैं। हालाँकि विशेषज्ञ इसे गिरावट नहीं, बल्कि भावों में सुधार की प्रक्रिया मान रहे हैं।
भारत में इसका सीधा असर आभूषण बाज़ार पर पड़ा—
विवाह के लिए ख़रीदारी बढ़ी
सामान्य ग्राहकों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ
कम भाव पर सोना ख़रीदने का अवसर मिला
कई सर्राफ़ा व्यापारियों का कहना है कि यदि भाव कुछ समय तक इसी स्तर पर टिके रहते हैं, तो माँग में और वृद्धि हो सकती है।
इस पूरे एक महीने की चाल को देखें, तो यह स्पष्ट होता है कि यह गिरावट असामान्य नहीं है। सोने के भाव हमेशा एक सीध में नहीं चलते। तेज़ी के बाद हल्की गिरावट आना बाज़ार की सामान्य प्रक्रिया है।
सोने की मूल स्थिति अब भी मज़बूत बनी हुई है और इसे दीर्घकालिक दृष्टि से सुरक्षित माना जा रहा है।
भावों के उतार-चढ़ाव से घबराने की आवश्यकता नहीं
दीर्घकालिक सोच के साथ निर्णय लेना बेहतर
गिरावट को अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है
जो लोग धैर्य और समझदारी के साथ चलते हैं, उनके लिए सोना आज भी भरोसे का माध्यम है।
आने वाले महीनों में सोने के भाव इन बातों पर निर्भर करेंगे—
महँगाई की दिशा
वैश्विक आर्थिक स्थिति
अंतरराष्ट्रीय तनाव
सरकारी और मौद्रिक नीतियाँ
यदि अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने की माँग फिर तेज़ हो सकती है और भावों में मजबूती लौट सकती है।
१ जनवरी २०२६ से १ फ़रवरी २०२६ तक का समय सोने के बाज़ार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान सोने ने ऊँचाई भी देखी और बड़ी गिरावट भी।
यह साफ़ है कि सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक है। उतार-चढ़ाव इसके स्वभाव का हिस्सा हैं, लेकिन सही जानकारी और धैर्य के साथ लिया गया निर्णय ही लंबे समय में लाभ देता है।
